The truth about early diagnosis of cancer.

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शुरूआती जांच में जितने लोगों को कैंसर से पीड़ित बताया जाता है. उसमे 99% लोगों को कैंसर रहता ही नहीं है. उन 99% लोगों की स्थिति, कैंसर के मरीजों की तरह (Cancer like condition) होती है. उस Cancer like condition में कम डोज वाला कीमोथेरेपी देकर ब्रांडिंग किया जाता है. कि यह मरीज़ कीमोथेरेपी से ही ठीक हुआ है. जबकि वास्तव में उस मरीज़ को कैंसर था ही नहीं.

They are not treating cancer. They are treating cancer like condition in the early stage of cancer.

लेकिन लोगों को बताया जाता हैं कि वह मरीज़ (Chemotherapy) कीमोथेरेपी से ठीक हुआ है. हमें पूरी तरह विश्वास दिला दिया जाता है कि कैंसर के मरीज़ कीमोथेरेपी से ठीक हो रहे हैं. लेकिन अगर किसी को वास्तव में कैंसर हो जाय और उसे फुल डोज वाली कीमोथेरेपी दी जाय (कम डोज नहीं, फुल डोज जिससे कैंसर की कोशिका मर सके), तो थोड़े ही समय बाद मरीज़ की ही मृत्यु हो जाती है.

यही वजह है कि जितने भी मरीज़ बड़े अस्पताल जाते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट हो या AIIMS. उन सब की मौत हो जाती है. जिंदा वही लौट पाते हैं. जिनको कैंसर नहीं है और कम डोज वाला कीमोथेरेपी दिया जाता है. और लोगों को यह भ्रम हो जाता है  कि उसका कैंसर कीमोथेरेपी से ठीक हुआ.

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